Author Archives: indra

Akbar- The Great and his Greatness?

Akbar- The Great and his Greatness?Yesterday I was reading the introduction of a book the English translation of an Indian scholar – Madhusudan Sarswati’s commentary of ‘The Bhagavad-Gita with the Annotation ‘Gudhartha Dipika’. It was translated by well-known Swami Gambhirananda. … Continue reading

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महाभारत के बाहर की दो महत्वपूर्ण

महाभारत के बाहर की दो महत्वपूर्ण गीतापिछले तीन-चार महीनों में मैंने ‘अष्टावक्र गीता’ एवं ‘अवधूत गीता’ पढ़ी।दोनों अद्वैत दर्शन के महत्वपूर्ण ग्रंथ माने जाते हैं। अष्टावक्र गीता में २० अध्याय हैं, पहले १८ अध्यायों में अष्टावक्र का उपदेश या विचार … Continue reading

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तुलसीदास का रामचरितमानस एवं उपनिषद्, भगवद्गीता कुछ दिनों से मैंने, अपना एक साहित्यिक दुख, जो अपनी मातृ भाषा हिन्दी या आंचलिक भाषाओं के बारे में है, बहुत हिन्दी के पंडितों, मित्रों से साझा किया है।क्यों हमारे हिन्दू धर्म के मूल … Continue reading

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A Real Great News- India Moving in Big Leauge

A Real Great News: Will it materialise with total R&D support to remain the most efficient? Billionaire Mukesh Ambani on Thursday announced in its annual General meeting, ‘a Rs 75,000 crore investment in setting up four ‘Giga’ factories to make … Continue reading

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कितनी गीता

कितनी गीतापिछले लेख (https://drishtikona.com/2021/06/05/हमारे-पुराने-ग्रंथों-में/) को मैंने यह कहते हुए समाप्त किया था, ‘महाभारत की अन्य गीताओं के बारे में अभी और नहीं जानता। पर महाभारत के पात्रों को ले अन्य अध्यात्म के ग्रंथों में ज़रूर और बहुत गीता हैं।अगली किस्त … Continue reading

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हमारे पुराने ग्रंथों में कितनी गीता

हमारे पुराने ग्रंथों में कितनी गीता हैं?क. महाभारत की गीतागीता आदि नाम ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ तीन शब्दों को मिला कर बना है- श्रीमत् + भगवत् + गीता. हम में अधिकांश को केवल एक लाख श्लोकों से पूर्ण महाभारत के एक ही भगवद्गीता … Continue reading

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प्रधान मंत्री मोदी जी से एक ज़रूरी प्रार्थना आम गाँववालों के लिये

प्रधान मंत्री मोदी जी से एक ज़रूरी प्रार्थना आम गाँव वालों के लियेबिहार, बंगाल, यहाँ तक कि अन्य प्रदेशों में गाँवों में स्वास्थ्य सम्बंधी बहुत काम नहीं हुआ। बिहार में मेरे गाँव, ननिहाल, ससुराल में ८० साल की तरह किसी … Continue reading

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गाँव क्या करे- रोयें या शहर भागे

आज रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता दिखी जो बहुत सामयिक है। पर मुझे इसके रचनाकार के विवाद में नहीं पड़ना, जिसकी भी हो बहुत सठीक एवं साम्य की दशा को दर्शा रही है। प्रभु रथ रोको!क्या महाप्रलय की तैयारी … Continue reading

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कोविद-१९ काल की दो विचार

पहला दुख प्रवासी मज़दूर समस्या, समाधान: आज इंडियन एक्सप्रेस में एक जाने माने कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी एवं बी. बी. सिंह का लेख पढ़ा प्रवासी मज़दूरों का। ये वे लोग हैं जिनका न अपना रहने की जगह होती है, न … Continue reading

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आत्मा- ब्रह्म कैसे दिखते हैं?

आत्मा- ब्रह्म कैसे दिखते हैंहमारे उपनिषदों के ऋषियों ने अपने जिस ब्रह्म को देखा उसका वर्णन किया है। हममें अधिकांश इसको मानने को तैयार न होंगे। पर अगर हम परमहंस रामकृष्ण, विवेकानन्द के निकटस्थ लोगों की अपने अनुभवों पर लिखी … Continue reading

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