Author Archives: indra

राम चरित मानस: एक मित्र को लिखा पत्र

राम चरित मानस: एक मित्र को लिखा पत्र राम-सीता (पुरुष-प्रकृति, परमात्मा- माया)एक दिन आपकों सीता के बारे में कुछ कहा था। आपने मुझे रामायन के उन अंशों को उद्धृत करने को कहा था। मुझे अब याद नहीं रहता। मैं उन … Continue reading

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देश के आज की शिक्षा व्यवस्था

आज के दिन मुझे दक्षिण भारत का पता नहीं पर उत्तर के हिन्दी प्रदेशों में सब सरकारी स्कूल और कालेज बन्द होते जा रहे हैं। आज के गरीब- अमीर सभी बच्चे प्राइवेट स्कूलों और ट्यूशन पर ही निर्भर हैं अपनी … Continue reading

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आज की कविता

जीवन का अन्तिम यह कालखंडकुछ बात पते की कहना हैमैं क्या जाना या क्या समझा?क्या कहूँ कि जीवन क्या होताक्या जीवन एक भ्रम मुश्किल साया बहुत सरल यह कहानी सा ।होता है प्रारंभ एक शून्य से जोहर समय कुछ जुड़ता … Continue reading

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कुछ आध्यात्मिक विचार

२.८.२०२६आज सबेरे मेरे पाठ में यह नीचे का श्लोक आ गया,जो दुनिया के सब बाल, युवा, गृहस्थ, वृद्ध के लिये सबके लिये उपयुक्त है। कृपया पढ़े, समझे पढ़ायें।भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥५.२९॥भोक्तारम् यज्ञ-तपसाम् सर्व-लोक-महेश्वरम् ।सुहृदम् सर्व-भूतानाम् … Continue reading

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कुछ याद आया

अपने बरामद से अपने बरामदे में लगे  लोहे के सिकंचों के पीछे से आज जो देखा, क्यों नहीं देख  पाया था पहले। होली के दिन प्रात: प्रात:  लाल लाल सोने की थाली से  प्यारे लगते सूरज को  देखा और देखता … Continue reading

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बंगाल का चुनाव- मेरी प्रतिक्रियाएँ

पश्चिम बंगाल की राजसत्ता- मुख्य मंत्री और उनका सत्ताकाल यह सब काल मैं देख सका हूँ –*1. Glorious Period- Durgapur, Salt Lake, KalyaniBidhan Chandra Roy: Jan 1950 – July 1962 (First CM of the state)Prafulla Chandra Sen: July 1962 – … Continue reading

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हिन्दमोटर कॉलोनी को खंडहर होने की तस्वीरों को देख 

कल उन फ़ोटों को Whatsapp पर देखा। कुछ यादें आ गईं। शाम को बिरलापुर में रहते अपने चचेरे भाई से बात किया। बिरलापुर की फैक्ट्री लोढा चला रहे हैं ठीक ठाक। और पूरा बिरलापुर करीब करीब  वैसे ही है।  मेरी … Continue reading

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सनातन धर्म की विडंबना

एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति । ऋ. 1.164.46-एक ही सत्य को विद्वान अलग अलग रूपों में व्यक्त करते हैं।ये विद्वान कौन ऋषि से जिन्हें वेद ने अलग अलग रूपों में व्यक्त करने का अधिकार दिया था। उनमें बहुतों ने अपना … Continue reading

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यह बदलता बिहार क्या सच में बदल जायेगा?

महीनों पहले ग़ाज़ीपुर के चमड़े के एक उद्योग के बारे में पढ़ा और सुना था। वे रशिया के थल सेना के जवानों को और अन्य नागरिक ज़रूरतों को पूरा करते थे। वैसी फ़ैक्टरियाँ हर ज़िलों में जहाँ कच्चे माल चमड़े … Continue reading

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बदलते बिहार के पीछे का प्रयास

जानें माने समाचार पत्र ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ में आज एक बिहार के कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बडा सकारात्मक रिपोर्ट दिखा। वैसे तो लगता है यह किसी इस समस के सरकार के व्यक्ति का प्रयत्न है चुनाव के देखते हुए। पर … Continue reading

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