Author Archives: indra

बिचारों के जंगल में-३

27.7.2017 नीतिश फिर से राजा बन गये उन्हीं का साथ ले जिन्हें वे अकारण छोड़ गये थे क्योंकि राजनीति में कोई लड़ाई ब्यक्ति बिशेष से तो होनी ही नहीं चाहिये अगर वह परिवार या जाति राज न चलाता हो. उस … Continue reading

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बिचारों के जंगल में-२

२७.६.२०१७ मेरे बिचार से श्रीमती मीरा कुमार को राम नाथ कोविन्द के बिरूद्ध राष्ट्रपति पद के चुनाव से हट जाना चाहिये, जब कि बिहार के मुख्य मंत्री तक उनके साथ नहीं हैं. केवल सोनिया गांधी के दबाव में उनकी प्रतिद्वंदिता … Continue reading

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Make in India: Some New Developments

Make-in-India & Nuclear Plants Why did India sleep on its own nuclear programme so long? India could have focused on R&D, continuous improvements, manufacturing and setting up of nuclear power plants of its own design in all these years as … Continue reading

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बिचारों के जंगल में-१

ज़माने भर का मुझे क्या करना जब अपने से ही फ़ुरसत नहीं २ एक हैं अरविन्द केजरीवाल एक राज्य की जीत ने जिन्हें सपने देखना सीखा दिया, सब विद्याओं में महारत दे दी, दिल्ली की गद्दी ने बहुत सारे दोस्तों … Continue reading

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पिछले दिनों की बिचार यात्रा 

१ 19.3.2017 कैसे ख़त्म होंगी हिन्दूओं में जाति प्रथा ? कैसे समझ पायेंगे साधारण रूढ़िवादी गाँव शहर के लोग जिन्हें जातियों एवं छूआछूत के भ्रम में रख न शिक्षित होने दिया गया, न सम्मानित , न समृद्ध कुछ धर्म के … Continue reading

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MAKE IN INDIA-My Dreams, My Views

1 Defence Services are failing ‘Make in India’: Bharat Karnad, Professor for National Security Studies at the Centre for Policy Research, New Delhi, writes in Open Magazine this week, “The three services also have in common the acute institutional hankering … Continue reading

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विचारों के बगिया से

10.2.2017 कल नोयडा में भोट है. किस पार्टी को यू. पी. के चुनाव में जीतना चाहिये? मीडिया के रिपोर्टों से यही लगता कि पार्टी की जीत जातिय समीकरण एवं अल्पसंख्यकों के झुकाव पर निर्भर है. मेरे ख़्याल से भारत के … Continue reading

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