Author Archives: indra

उपनिषदों की आचरण संहिता

उपनिषदों की आचरण संहिताहमारे आदिग्रंथ- वेद, उपनिषद्, गीता सभी में व्यक्तिगत अनुशासन,संयम, नियम, आचरण की ज़रूरत पर बल दिया गया है। व्यक्ति के कर्ममय जीवन के किसी क्षेत्र में प्राचीन काल से आजतक इनको निष्ठा के साथ मान कर ही … Continue reading

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ईशोपनिषद् और उसका महत्व -विद्या क्या है, कैसी हो एवं क्यों- ३

ईशोपनिषद् और उसका महत्व -विद्या क्या है, कैसी हो एवं क्यों- ३ एकाधिक उपनिषदों में विद्या और अविद्या विषय पर चर्चा है, जो औपनिषदिक है और लगता है वह व्यवहारिक नहीं है।मण्डूकोपनिषद् में शिष्य रूप में आये महा-गृहस्थ शौनक का … Continue reading

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India : A factory for the Quad

India : A factory for the Quad’: I am quoting from a columnist of India Express who in India Express today presents the case in the favour of India. Before giving his examples of India’s manufacturing power, I only add … Continue reading

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एक विस्मृत श्लोक कैसे पाया?

एक खोया श्लोक: आज सबेरे सबेरे यू. डी. चौबे जी का फ़ोन ने मेरी उनसे किये हुए एक श्लोक को सठीक जानने की इच्छा पूरी कर दी और इसके लिये मैं हृदय से कृतज्ञ हूँ। मेरे दादा जी मेरे किसी … Continue reading

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ईशोपनिषद् और उसका महत्व -२ आत्मा की सर्वव्यापकता की स्थापना एवं इसकी वैश्विक ज़रूरत ईशोपनिषद के तीन श्लोक पूरे विश्व के मनुष्य जाति को यह संदेश देते है जो ग़लत धारणा के कारण इस विश्व में लोगों को एक दूसरे … Continue reading

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ईशोपनिषद् और उसका महत्व

ईशोपनिषद् और उसका महत्वईशोपनिषद शुक्ल यजुर्वेद का अंश है, जिसे’ईशावास्योपनिषद’भी कहा जाता है। उपनिषदों में इसे प्रथम स्थान प्राप्त है। शंकराचार्य ने भी इस उपनिषद की विशेष प्रशंसा की है अपने भाष्य में। इसे वेदांत का निचोड़ मानने में शायद … Continue reading

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२०१९-२०२०:भगवद्गीता से उपनिषदों की ओर

२०१९-२०२०:भगवद्गीता से उपनिषदों की ओरपिछले साल में अपने को गीता के विभिन्न व्याख्या पुस्तकों में अधिकांश समय लगाया था। २०२० में विशेषकर कोविद काल की त्रासदी को भोगते कब उपनिषदों की तरफ़ झुकाव हुआ और फिर बढ़ता गया पता ही … Continue reading

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Ishopanishad and Mahatma Gandhi

I may have different views about many things about Mahatma Gandhi over the years of my life though I came in this world when Mahatma Gandhi was almost taken up as the saviour of India freeing it from 200 years … Continue reading

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वेदान्त, उपनिषद् एक परिचय

वेदान्त, उपनिषद् एक परिचयहमारे चार वेद-ऋक्, साम, अथर्व, एवं यूज़र् आदि है। वेदान्त वेदों के ही भाग हैं। वेदान्त’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘वेदों का अंत’ (अथवा सार)। वेदान्त को तीन मुख्य ग्रंथों के द्वारा जाना जाता हैं: वे … Continue reading

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उपनिषद् , विद्या, आधुनिक धर्मनिरपेक्ष शिक्षा का बहाना

भारत के क्रमबद्ध ज्ञान सृजन की कहानी वेदों से शुरू हुई….अर्जन में उसके पहले के लोगों से चली आती ज्ञान परम्परा का भी ख़्याल रखा ही होगा ऋषियों ने और शायद इसीलिये स्रजनकर्ताओं ने अपने नाम का कहीं ज़िक्र नहीं … Continue reading

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