Author Archives: indra

वेदान्त, उपनिषद् एक परिचय

वेदान्त, उपनिषद् एक परिचयहमारे चार वेद-ऋक्, साम, अथर्व, एवं यूज़र् आदि है। वेदान्त वेदों के ही भाग हैं। वेदान्त’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘वेदों का अंत’ (अथवा सार)। वेदान्त को तीन मुख्य ग्रंथों के द्वारा जाना जाता हैं: वे … Continue reading

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उपनिषद् , विद्या, आधुनिक धर्मनिरपेक्ष शिक्षा का बहाना

भारत के क्रमबद्ध ज्ञान सृजन की कहानी वेदों से शुरू हुई….अर्जन में उसके पहले के लोगों से चली आती ज्ञान परम्परा का भी ख़्याल रखा ही होगा ऋषियों ने और शायद इसीलिये स्रजनकर्ताओं ने अपने नाम का कहीं ज़िक्र नहीं … Continue reading

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Totapuri and Sri Ramakrishna- Two Great Enlightened Sadhaks

By about the end of 1865, Sri Ramakrishna was twenty-nine years old. He had finished his ten years-long sādhanās based on the path of bhakti (devotion) in which the devotee looks upon God as a Person. He had been blessed … Continue reading

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आज के परिप्रेक्ष्य में तुलसीदास और उनके राम

आज के परिप्रेक्ष्य में तुलसीदास उनके रामनानापुराणनिगमागम के ज्ञानी तुलसीदास(१४९७-१६२३) ने अपने इष्टदेव की तरह श्री राम को ही क्यों चुना? उनके समय में एवं पहले से ही भक्त कवियों में कृष्ण छा चुके थे जयदेव (१२०० ई.), सूरदास(१६४८-१५८४), मीरा(१४९८–१५४६) … Continue reading

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सामयिक अध्यात्म

भारत हर दिन 11.72 लाख COVID-19 टेस्ट कर रहा है…..यह अपने आप में एक मिसाल है कि चाह होने पर भारत के लिये सब संभव है….इस लिये देश के हर व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की इच्छाशक्ति होनी ज़रूरी है….इसे … Continue reading

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सत्यकाम की कहानी

छान्दोग्योपनिषद् सामवेद के छान्दोग्य ब्राह्मण में है अध्याय ४ के चौथे खंड से आरम्भ होती है सत्यकाम की कहानी और इसके रचना का समय आठवीं से छठवीं ई.पू.का माना जाता है। हम आज जब उस समय की एक कथा कहते … Continue reading

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कठोपनिषद् की कहानी

कठोपनिषद् की कहानी: कठोपनिषद् उन दस प्रमुख उपनिषदों में से एक है, जिन पर शंकराचार्य ने अपना भाष्य लिखा था। यह मृत्यु के देवता यमराज के साथ एक पिता और उनके इकलौते पुत्र नचिकेता के संवाद की एक अनूठी कहानी … Continue reading

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अध्यात्म यात्रा की यादें

हिन्दुस्तान मोटर्स में काम करते समय मुझे एक दिन हावड़ा स्टेशन पर महात्मा गांधी साहित्य की किताबों की एक छोटी दुकान खुली दिखी नई नई….मैंने वहीं से एक छोटी पॉकेट में आनेवाली पुस्तक ख़रीदी थी ‘आश्रम भजनावलि’. पहली पुस्तक जब … Continue reading

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भारत की एक आध्यात्मिक यात्रा- एक सरल विवरण

उपनिषदों, यहां तक की भगवद्गीता में भी वैदिक काल के देवों के नाम ही है जैसे ईश्वर, रूद्र, अग्नि, वायु, सूर्य, फिर इन्द्र. उपनिषद् काल तक हिन्दू धर्म के त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव तथा उमा एवं काली का नाम … Continue reading

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बृहदारण्यकोपनिषद् और तत्कालीन समाज में नारी

बृहदारण्यकोपनिषद् और तत्कालीन समाज में नारी: आजकल जब इस उपनिषद् को पढ़ने समझने की कोशिश कर रहा हूँ तो एक सांसारिक व्यक्ति होने के चलते उस समय के कुछ सामाजिक पक्षों की ओर सोचने के लिये बाध्य होना पड़ता है. … Continue reading

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