Category Archives: Uncategorized

आज के परिप्रेक्ष्य में तुलसीदास और उनके राम

आज के परिप्रेक्ष्य में तुलसीदास उनके रामनानापुराणनिगमागम के ज्ञानी तुलसीदास(१४९७-१६२३) ने अपने इष्टदेव की तरह श्री राम को ही क्यों चुना? उनके समय में एवं पहले से ही भक्त कवियों में कृष्ण छा चुके थे जयदेव (१२०० ई.), सूरदास(१६४८-१५८४), मीरा(१४९८–१५४६) … Continue reading

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सामयिक अध्यात्म

भारत हर दिन 11.72 लाख COVID-19 टेस्ट कर रहा है…..यह अपने आप में एक मिसाल है कि चाह होने पर भारत के लिये सब संभव है….इस लिये देश के हर व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की इच्छाशक्ति होनी ज़रूरी है….इसे … Continue reading

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सत्यकाम की कहानी

छान्दोग्योपनिषद् सामवेद के छान्दोग्य ब्राह्मण में है अध्याय ४ के चौथे खंड से आरम्भ होती है सत्यकाम की कहानी और इसके रचना का समय आठवीं से छठवीं ई.पू.का माना जाता है। हम आज जब उस समय की एक कथा कहते … Continue reading

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कठोपनिषद् की कहानी

कठोपनिषद् की कहानी: कठोपनिषद् उन दस प्रमुख उपनिषदों में से एक है, जिन पर शंकराचार्य ने अपना भाष्य लिखा था। यह मृत्यु के देवता यमराज के साथ एक पिता और उनके इकलौते पुत्र नचिकेता के संवाद की एक अनूठी कहानी … Continue reading

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अध्यात्म यात्रा की यादें

हिन्दुस्तान मोटर्स में काम करते समय मुझे एक दिन हावड़ा स्टेशन पर महात्मा गांधी साहित्य की किताबों की एक छोटी दुकान खुली दिखी नई नई….मैंने वहीं से एक छोटी पॉकेट में आनेवाली पुस्तक ख़रीदी थी ‘आश्रम भजनावलि’. पहली पुस्तक जब … Continue reading

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भारत की एक आध्यात्मिक यात्रा- एक सरल विवरण

उपनिषदों, यहां तक की भगवद्गीता में भी वैदिक काल के देवों के नाम ही है जैसे ईश्वर, रूद्र, अग्नि, वायु, सूर्य, फिर इन्द्र. उपनिषद् काल तक हिन्दू धर्म के त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव तथा उमा एवं काली का नाम … Continue reading

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बृहदारण्यकोपनिषद् और तत्कालीन समाज में नारी

बृहदारण्यकोपनिषद् और तत्कालीन समाज में नारी: आजकल जब इस उपनिषद् को पढ़ने समझने की कोशिश कर रहा हूँ तो एक सांसारिक व्यक्ति होने के चलते उस समय के कुछ सामाजिक पक्षों की ओर सोचने के लिये बाध्य होना पड़ता है. … Continue reading

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उपनिषद – आज भी उपयोगी

उपनिषदों की सार्थकता: बृहदारण्यकोपनिषद् में अध्याय ५ के दूसरे ब्राह्मण में एक छोटी कहानी है. तीन शब्दों में हर प्रकृति के व्यक्तियों के लिये आदर्श आचरण का ज्ञान भरा, जो आज भी सार्थक लगता है. प्रजापति के तीन – देव, … Continue reading

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हिन्दुओं में धर्म से बढ़ती दूरी

हिन्दुओं में धर्म से बढ़ती दूरीपता नहीं क्यों लगता है कि अपने को शिक्षित माननेवाले लोगों में एक होड़ मची है अभिजात वर्ग का कहाने की, नास्तिक बनकर, पुरानी सब मान्यताओं को बिना कारण समझे,गंवारपन या पुरानपंथी होने की संज्ञा … Continue reading

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कोरोना अनुभव

१ कोविद-१९ की ज़रूरत-कुछ अनुभव, कुछ जरूरातसोनिया गांधी, और अन्य सभी विरोधी राजनीतिक दल के लोगों और कार्यकर्ताओं, देश के सारे NGOs, समाजसेवी संस्थाओं, सभी व्यवसाय मालिकों से कुछ निवेदन हैं देशहित यह कदम उठाने का, कोविद-१९ के पहले के … Continue reading

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