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Let Bhagawad Gita Lead us to light

“I find a solace in the Bhagawad Gita….When disappointment stares me in the face and all alone,I see not one ray of light, I go back to the Bhagawad Gita.”- Mahatma Gandhi “The Gita is a bouquet composed of the … Continue reading

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ज्ञान का लक्ष्य -एक सुदृढ़ समाज

हमारे यहाँ राजनेता हिन्दू धर्म को मनुवादी बताते हुये दलितों को धार्मिक ज्ञान से दूर रहने की सलाह देते हैं. आज सबेरे के स्वाध्याय में निम्न श्लोक पढ़ा,जो मनु के अनुसार चारों वर्णों- ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य, शूद्र- का धर्म कहा गया … Continue reading

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अबोध बच्चे एवं हमारी ज़िम्मेदारी

भगवद् गीता में कृष्ण ने ‘सर्वकर्मफलत्याग’(समस्त कर्मों के फल का त्याग) को ही उपासना,अभ्यास,ज्ञान,ध्यान से भी उत्तम रास्ता बताया है भगवत् प्राप्ति का.इस ८० के नज़दीक के उम्र में हम क्या कुछ अच्छा कर्म करें-जो हम कर सकें एवं मन … Continue reading

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भगवद् गीता एवं जातिवाद

जातिवाद हिन्दुस्तान एवं हिन्दू धर्मियों के लिये अभिशाप है और भारत की सम्भावित उन्नति का सबसे बड़ा बाधक है. यह एक ख़ास वर्ण की इतिहासिक साज़िश द्वारा बनाया संक्रामक जानलेवा ब्याधि है, हिन्दूओं के कुरीतियों में सबसे ख़तरनाक है, और … Continue reading

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गीता एवं आत्मोत्थान

भगवद् गीता के बिभिन्न अध्यायों में अलग अलग प्रकार के ब्यक्तियों के गुणों को एक एक कर बताया गया है: स्थितप्रज्ञ, योगयुक्त भक्त,आत्मचेता,गुणातीत साधक, दैवी सम्पदा युक्त ब्यक्ति,सात्त्विक कर्त्ता.पर हर ब्यक्ति के स्वभाव, आचरण एवं कर्म का बिभाजन भी बहुत … Continue reading

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Gita through one Sloka

Swami Sivananda in his commentary has prescribed the one Sloka 78 of Chapter 18 of Bhagawad Gita as एकश्लोकी गीता. He has also compiled a सप्तश्लोकी गीता with seven Slokas from Gita. One can read, understand and ponder over. I … Continue reading

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Bhagawad Gita is as secular as Yoga

I wish one day the minorities in India accept it. Every educated Indian or for that matter every educated person world over must try to read, understand and practise the clear prescriptions for self improvement provided in plenty in Bhagawad … Continue reading

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