राहुल गांधी- विकृत सोच

राहुल गांधी- विकृत सोच
अचानक ही एक उम्र जनित गलती के कारण मैं कल फिर राहुल गांधी का नेता विपक्षी की तरह दूसरी बार लोकसभा को सम्बोधित करते सुना। मन में एक बड़ा प्रश्न आया। उन्होंने माता पिता से क्या सीखा है और जिस माहौल में बढ़े हैं वह क्या ऐसा ही व्यक्तित्व गढ़ता है? राहुल गांधी को पिछले कुछ समय से प्रशिक्षित करनेवाले किस तरह के लोग हैं? राजगद्दी पर बैठने के लिये वे ऐसे झूठ और ग़लत रास्ते का सहारा ले रहे है। जिससे यह लगता है कि उन्हें इस देश और उसके लोगों का रत्तीभर भी ख़्याल नहीं है।
आज पचास से ऊपर की उम्र में ऐसी अपरिपक्वता पता नहीं उन्हें गद्दी दिलायेगी या नहीं, पर एक बात तय है कि हिन्दू समाज का सत्यानाश हो जायेगा।
पिछले सालों का जाति प्रथा को हिन्दू समाज से मिटाने का मोदी सरकार एवं आर.एस.एस के भागवत का प्रयास मिट्टी में मिल जायेगा। देश में अराजकता फैल जायेगी। कैसे हज़ारों जातियों में बंटे जनसंख्या से सभी जातियों से सभी पदों पर उनकी संख्या के प्रतिशत के आधार पर हर लेवल पर लोग हो सकते है?
राहुल आजकल हिन्दू धर्म के देवों के ब्रह्म रूपों के बारे में विना किसी सनातन धर्म के ग्रंथों के ज्ञान के बातें कर रहे हैं। कहीं कहाई या सुनी सुनाई बातों को तर्क में देना वैसे ही है जैसे मेरे अपने एक बाबा को मैं समझा नहीं पाया की धरती घुमती है। पर हिन्दू धर्म के ग्रंथों को सभी ध्यान से पढ़ने की ज़रूरत और उसका संदर्भ लें बोलने के वक्त उसका सत्य भाव से रखना जरूरी है नहीं तो अनर्थ हो जायेगा। हिन्दू धर्म और संविधान का विना किसी प्रौढ़ता का हवाला देना बहुत नुक़सान करता रहेगा आज डिजीटल मीडिया के सार्वभौमिक उपलब्धता के कारण। राहुल न शिव के बारे में जानते, न महाभारत के, न कृष्ण, न राम के। अगर नहीं जानते तो ग़लत मनगढ़ंत चीजों को न कहें। बहुत बवाल हो सकता है । हिन्दू धर्म और उनके श्रेष्ठ सगुन नाम को ले, आगे बात न करें।
राहुल गांधी को इस रास्ते हटना चाहिये। यह विजातीय रास्ता है। पता नहीं सुनहरे भारत, विकसित भारत की परिकल्पना ऐसी राजनीतिक स्थिति में संभव हो पायेगी। शायद नहीं, जो सभी विदेशी शक्तियाँ चाहती हैं।

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