मोदी की नई सरकार


एक तरह से चन्द्रबाबु नायडू का मोदी के साथ आना और ओड़िसा में बीजेपी के आने से देश में औद्योगिक प्रगति का एक नया दौर चालू होने का बातावरण बन रहा है। आन्ध्रप्रदेश और ओड़िसा समिल्लित समुद्रीय तट क्षेत्र चीना के सेनजेन प्रदेश की औद्योगिक क्षेत्र के बराबरी का ही एक औद्योगिक क्षेत्र बन जाने की संभावना रहेगी, क्योंकि औद्योगिकरण के क्षेत्र में मोदी की तरह ही नायडू भी रहे हैं। हैदराबाद का बंगलौर के बाद एक दूसरा देश के एक बड़े आई.टी केन्द्र की तरह उभरना केवल नायडू के कारण ही सम्भव हो पाया है। उनका अमरावती को प्रदेश की नई राजधानी की तरह एक विश्वस्तरीय नगर बनाना भी वह सपना है जो मोदी के सपनों से मेल खाता है। मोदीजी को नायडू की मदद करनी बिना किसी हिचक के। आँध्र कृषि क्षेत्र में भी बहुत आगे है और मोदी जी नायडू को आंध्र के कृषि क्षेत्र को पंजाब से बेहतर निर्यात करने वाला सबसे बड़ा प्रदेश बनवाने में मदद कर सकते हैं, वहाँ के किसानों की सभी उपज को पंजाब की तरह FCI से MSP पर ख़रीदवा कर। आंध्र में फ़ूड प्रोसेसिंग का सबसे बड़ा प्रदेश बनने का मादा है। इसी तरीक़े को उन्हें ओड़िसा में समुद्री किनारे को उन्नत बनाने में करना चाहिये और ओड़िसा को इसमें चन्द्रबाबू नायडू की सहायता लेनी चाहिये जो उनकी साख को बढ़ायेगा और भारत की उन्नति का रास्ता खोलेगा। ओड़िसा में एक बडा पोर्ट बनाने और उसे रेल रोड से जोड़ने की ज़रूरत है।
पर समझ में नहीं आता नीतिश जी कैसे बिहार के लोगों को शिक्षित और समृद्ध बनाने में और मोदी के दर्शन को जमीनस्तर लागू करने में मोदी की सहायता करेंगे, जिससे आम जनता खुश हो सकें। कैसे वे बिहार के शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करेंगे और कृषि क्षेत्र में कुछ अनुठी व्यवस्था ला सकेंगे? बिहार की शिक्षा व्यवस्था था पूरी तरह से ख़त्म हो चुकी है और उसे एक बहुत मज़बूत इच्छाशक्ति का व्यक्ति फिर पटरी पर ला दौड़ा सकता है। बहुत कुछ किया जा सकता है, अगर वहाँ कृषि क्षेत्र में आमूल परिवर्तन किया जाये और एक सफल टेक्नीकल झुकाव वाले व्यक्ति की बात मानी राजनीति कुछ सालों के लिये एकदम छोडकर । जो मेरे विचारों से सहमत हो, बताइये।

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