देश का आज का विजनेस सम्प्रदाय-एक बिचार


देश के विदेश मंत्री का बिचार सुनिये –
Jaishankar’s Big Warning To Indian Businesses On China Trade। https://youtu.be/4H72VSILFss?si=mlDDNbfGaOJ6i5bN


अब पढिये कुछ मेरा ८५ साल का उद्योगक्षेत्र का अनुभव और अगर नहीं सहमत है तो बताइये।

देश के ग़द्दार विजनेस सम्प्रदाय का कोई धर्म ईमान नहीं हैं, एकमात्र ध्येय या लक्ष्य अपनी और अपनी सात पीढ़ी के लिये सम्पति जमा करने को छोड़ कर।


आप खुद बिचार करिये ये अरबपति जो अपने धन का नंगा प्रदर्शन कर और करवा रहे है कभी सोचते हैं कि कहाँ से आया है धन- क्या इसी भारत से नहीं? क्या वे खुद या उनकी संतानें अपने धन के बल पर अमर हो जायेंगे, सब दुखों से मुक्त? क्या कोई आजतक हुआ है? यही हमारे धर्मगुरुओं ने भी बताया है।


फिर
क्यों अपनी बच्चों की शादियों के समारोह में चार सौ बरात में निमंत्रित के अपने अपने विमान से आने के कारण जामनगर हवाई अड्डे के जैम हो जाने की खबर समाचार में आ जाता है? क्यों उनके अरबों के खर्च वाले शादी की चर्चा सब अख़बार करते है? उनके देश विदेश के शहरों में सैकड़ों करोड़ रूपये या विदेशी मु्द्रा के घरों या महलों का समाचार आये दिन होता है? क्यों आपके वारड्रोब का भंडार समाचार बनता है? क्यों क्यों आपका चार साल का पोता पैदा होते ही अरबों का मालिक बन जाता है?

अब आप बताये कितने अमरीका के उद्योगपति भारत में अपना घर ख़रीदते हैं? आप अपनी अमरीकन विश्वविद्यालयों को तो बड़ी राशि में अनुदान देते हैं जहां आप इसलिये पढ़ने गये क्योंकि भारत के टॉप यूनिवर्सिटी में आपको दाख़िला नहीं मिलता। कितने उद्योगपति IISc, IITs, या अन्य ऐसे संस्थाओं में करोड़ों का भी दान देते हैं, जब उनकी सेवा सब लेते हैं ज़रूरत पड़ने पर?


अपने हर उद्योग में कितना आयात करते हैं चीन या अन्य देशों से? क्या आपने अपनी कोई इच्छाशक्ति और भारत में उपलब्ध ज्ञान को इन आयातित चीजों के बदले में उन्हें अपने यहाँ उत्पादित करने पर लगाया है या अच्छी गुणवत्ता की चीजों को ज़्यादा से ज़्यादा निर्यात कर चीन की श्रेणी में भारत को पहुँचाने का यत्न किया है? कितने उद्योगपति यहाँ बनते चीजों को चीन के कम्पनियों को सैंपल दे वहाँ से सस्ता वैसे ही दिखता माल आयात कर भारतीयों को बेंचते है और धन कमाते हैं?
विकसित भारत का सपना क्या एक साधारण घर के प्रधान मंत्री, जिसका कुल धन ३.५० करोड़ है, का ही होना चाहिये? आपने अपने सभी व्यवसायों के लिये २०४७ के विकसित भारत के मेल का सपना क्यों नहीं बनाया या अभी भी बनाने की कोशिश कर रहे हैं? आप अपने धन को R&D में खर्च कर अपनी कम्पनियों को दुनिया की सबसे बड़ी ब्रैंडेड कम्पनी क्यों नहीं बना सकते है? क्या नये अनुसंधान सरकारी अनुसंधान केन्द्रो में ही होना चाहिये? ये अरबपति क्यों अपने सबसे छोटे से छोटे कर्मचारी को संसार के ‘पर कैपिटा’ के बराबर मासिक वेतन नहीं देने का सपना देखते, या कम से कम अपने जीवन काल में करोडपति?


क्यों कम्पनी के कुल मुनाफ़ा के हक़दार केवल मालिक, शेयर होल्डर और ०.२ प्रतिशत उनके केवल सर्व्वोच अधिकारी ही होते है? आज भारत के व्यापार का सबसे बड़ा हिस्सेदार चीन बन गया है अमरीका को हटा। एक उदाहरण देखिये, टाटा, महिन्द्रा आदि बिजली के कार बहुत साल पहले बनाये, बाज़ार में भी लाये, पर आगे बढ़ टेस्स्ला की तरह नहीं बनने की कोशिश किये। वे आज भारत की ज़रूरत पूरा करने की भी कोई कोशिश करते भी नहीं दिखते, किसी अपना अस्तित्व बनाये रखने का ध्येय है। चीनी कार कम्पनियाँ आती जा रहीं हैं। बाहर के लोग भारत के मोटर उद्योग बार बार चेता रहे हैं, पर यहाँ कोई ऐसी हड़बड़ी नहीं हो जायेगा तो ठीक है, नहीं होगा तो हमारा क्या नुक़सान होगा। टाटा और महिन्द्रा दोनों विश्वस्तरीय कम्पनी बन सकते हैं, पर लगता है कहीं दृढनिष्ठा और आत्मविश्वास की कमी है।


आज विदेश मंत्री जयशंकर को बोलते देखा तो मुझे भी बहुत दुख हुआ और यह लिख बैठा। कौन पढ़ेगा, कौन सुनेगा, और कौन करेगा? पर अपने व्यक्ति प्यास की तरह पहले मोदीजी को एक ट्वीट किया” @narendramodi कृपया टाटा और महिन्द्रा को जल्दी EV cars के प्रोडक्शन को देश के ज़रूरत के बराबर करें हर महीनेलाखों में, नहीं तो चीन की EV की सैकड़ों कम्पनियाँ भारत में छा जायेंगीं ।टेस्सला या पैनासोनिक को गाड़ी की कम्पनी के पहले एक EV के बैट्री की कम्पनी यहाँ लगवाने की पहल कीजिये।”
और फिर यह ..
Jaishankar’s Big Warning To Indian Businesses On China Trade, Days After Xi Jinping’s Europe Tour”

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