कुछ अपनी, कुछ जग की

आज फिर मकर संक्रान्ति है. आज के दिन हमारे यहाँ सबेरे स्नान कर चावल, दाल छू उसका दान करते हैं ब्राह्मणों को. कुछ साल से मैंने ब्राह्मण की परिभाषा में बदलाव किया है. अपनी जानकारी में जो ज़रूरतमंद है वही दान देने योग्य ब्राह्मण है हमारे लिये. आज का दान भी वैसे ही किसी को दिया जायेगा. दोपहर का भोजन चिउरा दही होगा, ‘मिस्टी दइ’ लाया हूँ . रात के खाने में खिचड़ी होगी. यही प्रथा है. इस दिन गंगा स्नान भी किया जाता है. मैंने भी बहुत बार किया है. गंगासागर में इस दिन के स्नान का बहुत महत्व है, स्वर्ग में स्थान निश्चित कर देता है. हम भी एक बार कोशिश किये थे. पर कर नहीं पाये. जल का छिड़काव ही कर धन्य हुये. सर्दी के आते ही गाँव के तिलवा, हल्दी मेथी और सोंठ के लड्डू की याद आती है जो मेरी परदादी और बाद में माँ बनाती थीं. पर उन सबको याद कर दुख ही होता है. समय के साथ सब ग़ायब हो जायेंगे और लोग डोनट में आनन्द लेंगे… यही दुनिया है और …..इस दिन की एक और बिशेषता है कि यह हर साल जनवरी १४ को ही पड़ता है अत: भूलने की गुंजाइश नहीं होती. इस बार तो अजित कुमार जी का योगदान इसे और भी बिशेष बना दिया है……
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एक बात बहुत दिनों से कहना चाहता था । बिभा का असमय अन्त सबको दुख दिया । पर अभी तुम्हारी सक्रिय ज़िन्दगी के बहुत साल बाक़ी है । बढ़ती उम्र के साथ एक संगी की ज़रूरत भी बढ़ती जाती है । बच्चों की अलग दुनिया बस जाती है । संयुक्त परिवार के ख़त्म होने से यह समस्या और तकलीफ़देय होती जा रही है , और एक अच्छी संगी अच्छे जीवन यापन के लिये ज़रूरी है। उसे खोजने के प्रयास में कोई ग़लती नहीं है।
अगर तुम कहो तो मैं बच्चों की राय लूँ ।
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प्रिय अलोक,
पिछले दिनों की घटनायें बहुत दुख भरी रही । बिभा की असामयिक मौत दिल दहला गई, क्या किया जा सकता सोच कर भी दुख होता है। मैं तो आजतक अशोक से बात करने की शक्ति नहीं जुटा पाया। पर भगवान उसकी आत्मा को शान्ति दें।
हर ब्यक्ति कल की सोचता है। मैं कुछ दिनों से इसी उधेड़बुन में हूँ । मैं अपने पीछे क्या छोड़ जाऊगां? एक बात मेरे मन में आई है, इसीलिये यह पत्र है।
मैं चाहता हूँ कि मेरी हिस्से की ज़मीन में, जिसमें तुम लोग सब्ज़ी आदि लगाते हो, परिवार के लोगों की याद में एक छोटा बग़ीचा लगाया जाये। इसके लिये पहली ज़रूरत होगी उसका हातेबन्दी करने की । मेरा अनुरोध है कि तुम इसे करवा दो। काम हो जाने पर हमें उसका लागत बता दो, दूसरे दिन तुम्हारा पैसा मैं भेज दूँगा। इसी बीच १० हज़ार महीने तक का एक माली खोज दो, जो हमारे सपने को वास्तव रूप दे दे।
कृपया इसे समझो और इसे रूप देने में मेरा साथ दो। इस गरमी में अगर हातेबन्दी का काम हो जाये तो बरसात में बृक्षारोपण किया जा सकेगा। तुम तो बिहार सरकार से भी जानकारी जुटा सकते हो क्योंकि कृषि ही तुम्हारा बिषय रहा है।
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अलोक से पता चला बिहार में मकर संक्रान्ति या खिचड़ी आज मनाया जा रहा है. अजित कुमार जी का भेजा चिउरा, तिलकुट, और अन्य बस्तुयें तो कल ही मिल गई थी. हमें हार्दिक ख़ुशी इस बात की है कि अजित जी दूर देश में बसे बिहारियों को बिहार की ख़ास आकर्षण को उपलब्ध कराने के प्रयत्न में हैं ब्यवसायिक रूप से. मैं उनकी सफलता की कामना करता हूँ. कल आनन्द से बात हो रही थी, बहुत ख़ुश हुआ और पूछा कि क्या अमरीका को भी अजित जी भेज सकते हैं. मेरे पास उत्तर नहीं था. पर आज के ज़माने में सब सम्भव है. सोनाचुर चावल और तिलकुट (गुड वाला) मेरी पसन्द है और इसकी कमी खलती थी. शायद अब समाधान मिलता नज़र आ रहा है.
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कल शाम को मेघदूतम् पार्क में जाते समय देखा इकठ्ठा किये घास पाँत को जलते हुये, गेट पर गार्डों को सूचित किया, लौटने के समय देखा आग बुझाया जा चुका था. काफ़ी जागरूकता की ज़रूरत आम लोगों में . जब नज़र उठाया पता करने के लिये प्रदूषण का हाल, तो चारों तरफ़ धुँआँ ही दिखाई दिया आसमान में…..
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ब्राह्मणों को बाहुबली बनते देख दुख होता है, कंहा मंडन मिस्र या अमरनाथ झा बिद्वानों के सिरमौर और कंहा आज के कुख्यात बाहुबली संतोष झा पूरा बिहार जिसके नाम से डरता है । पहले बाल्मीकी या ब्यास ब्राह्मण बन जाते थे, अब ब्राह्मण शुद…. बनने में लगे हैं……
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औरतों के मामले में कुछ कहने में डर लगता है, चाहे ममता की सह पा मालदा की मुस्लिम शक्ति का प्रदर्शन हो या जयललिता एवं सोनिया का GST का बिरोध हो । महिलाएँ किसी हद तक जा सकती हैं अपने देवीत्व को बचाये बनाये रखने के लिये…..बंगाल और तमिलनाडु किसी अलग देश का हिस्सा लगते हैं कभी, कभी…
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रेल यात्रा और टि्वटर : झांसी डिविजन, ट्रेन संख्या 18507 के बी1 कोच में सफर कर रहे बीएम मित्तल ने जीएम एनसीआर को ट्वीट कर बताया कि, वे डायबीटिक हैं और स्टाफ उन्हें शुगर फ्री चाय नहीं दे रहा है. इस ट्वीट के बाद जीएम ने कामर्शियल कंट्रोल को सूचना दी. डिप्टी सीसीएम ने सूचना के बाद झांसी डिविजन के अधिकारियों से संपर्क किया और ग्वालियर में यात्री को शुगर फ्री चाय उपलब्ध करा दी गयी.
गुड़गांव के रहने वाली रचना निबोरिया अपनी बेटी के साथ ट्रेन संख्या 12985 में यात्रा कर रही थीं. अचानक बेटी की तबियत खराब होने पर उन्होंने पति को इसकी सूचना दी. उनके पति ने अपने टि्वटर से उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरूण सक्सेना को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. जानकारी के बाद जीएम ने कमर्शियल विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी. रचना का मोबाइल नंबर अधिकारियों को दिया गया. एनसीआर के कमर्शियल अधिकारियों ने सीनियर डीसीएम जयपुर को इसकी सूचना दी और ट्रेन में बीमार बच्ची का इलाज कराया गया. इस तरह प्रभु रेलवे यात्रा को बेहतर बनाने में लगे हैं……….आप भी लाभ उठाइये और मज़े मज़े यात्रा कीजिये रेल से….. बढ़ रहा है न देश आगे…….

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