कठोपनिषद् की कहानी

कठोपनिषद् की कहानी: कठोपनिषद् उन दस प्रमुख उपनिषदों में से एक है, जिन पर शंकराचार्य ने अपना भाष्य लिखा था। यह मृत्यु के देवता यमराज के साथ एक पिता और उनके इकलौते पुत्र नचिकेता के संवाद की एक अनूठी कहानी है. यम ही नचिकेता के आध्यात्मिक गुरु भी हैं इस उपनिषद् में. नचिकेता के पिता वज्रसेवा हैं जो मोक्ष प्राप्त करने के लिए अपनी सारी संपत्ति ब्राह्मणों को दान दे रहे थे। नचिकेता उनका इकलौता बेटा है, एक बहुत छोटा लड़का है, लेकिन जो कुछ भी उसने शास्त्रों से सीखा है, उसके लिए बहुत वफादार है।जब नचिकेता ने दान के बीच देखा कि उनमें वे गायें भी हैं जो बुढ्ढी हैं एवं दूध नहीं दे सकती, तो वह अपने पिता के गलत काम के बारे में हैरान और आश्चर्यचकित हो गये|धर्मग्रंथ ऐसी गायों को दान में देने पर रोक लगाते हैं। अपने पिता को यह समझने में मदद करने के लिए, उन्होंने तीन बार अपने पिता से पूछा, “आप मुझे किसे देंगे?” नचिकेता खुद पर अपने पिता का आधिपत्य मानता था। उनके पिता नाराज हो गए, अपना आपा खो दिए और ग़ुस्से में कहे, “मैं तुम्हें यम, मृत्यु के देवता को देता हूँ. नचिकेता इसे अपने दिल में ले यमालय को चल दिये। जब नचिकेता यम के निवास पर पहुंचे तो यम अपने महल से बाहर गये थे कुछ दिनों को लिए और किसी ने भी इस अद्वितीय अतिथि का स्वागत नहीं किया। अतिथि का पूर्ण सम्मान करने का नियम यम के निवास के लिए भी एक महत्वपूर्ण ज़रूरी तरीक़ा था। यम के वापस आने से पहले नचिकेता को तीन रातों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी सभी कष्टों के बावजूद. जब यम वापस लौटे एवं नचिकेता के आतिथ्यरहित इंतजार के बारे में जाने तो उन्होंने कहा, “हे आध्यात्मिक अतिथि, मैं आपको उन तीन रातों की तकलीफदायी प्रतीक्षा की क्षतिपूर्ति करने के लिए तीन वरदान देता हूं, आपके हर कष्टकारी रात के लिये एक । आइए हम सुनें कि नचिकेता ने पहले वरदान के रूप में क्या मांगा? “मेरे आपके पास से लौटने के बाद मेरे पिता मुझ पर क्रोध प्रकट न करें, वह मुझे पहचान लें और पहले की तरह मेरे वापस लौटने पर अपना हार्दिक प्यार जताए।” यम ने सकारात्मक रूप से कहा, “मैं इस बात को स्वीकार करता हूँ। तुम्हारे पिता तुम्हें पहले की तरह प्यार से स्वागत करेंगे, जब तम यहां से वापस जा उनसे मिलोगे। आपको मुक्त हुए देख वे फिर से चैन की नींद सोयेंगे।”
क्या हम इस बात की सराहना कर सकते हैं कि पिता के सबसे भयानक शाप देने के बाद भी एक बेटा ने ऐसा प्रदान मांगा? हमारी अगली पीढ़ी को इस कहानी से कुछ सबक लेना चाहिए? हम सिर्फ अपनी ही पुरानी शिष्टाचार की परंपराओं से अलग क्यों होते जा रहे हैं और हम बने बच्चों को अपने अमूल्य धरोहर इन शास्त्रों की कथाओं से क्यों नहीं उनके बचपन में अवगत कराते? अपने हम उम्र के किसी मोड़ पर तो इन ग्रंथों के मूल या सरल उपलब्ध पुस्तकों का अध्ययन करने की कोशिश करें. और नहीं तो सरल अमर चित्रकथा सीरिज़ को ही पढ़ें..आज बहुत ही आकर्षक अंग्रेजी या आंचलिक भाषाओं में लिखी ये पुस्तकें उपलब्ध हैं.
नचिकेता के पहले वरदान ने न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि वह अमर भी हो गया। उसके अन्य दो वरदानों ने साधकों के लिए स्वर्गीय जीवन पाने या अमरता प्राप्त करने का मार्ग खोल दिया.दूसरे वरदान में नचिकेता स्वर्गलोक, जहां सभी व्यक्ति ज़रा, मृत्यु आदि से मुक्त होते हैं, पाने के लिये जिस यज्ञ का आयोजन करना ज़रूरी है, यमराज से उसकी सम्पूर्ण जानकारी ली…यमराज के विस्तृत उपदेश को नचिकेता ने आत्मसात् कर बताकर उन्हें प्रसन्न किया…यमराज ने वरदान में कुछ और जोड़ दिया….’इस विशेष यज्ञ को आज के बाद नचिकेता यज्ञ के नाम से जाना जायेगा एवं ऊपर से एक दिव्य रत्नों की माला भी दी….और तीसरे इच्छित वर बताने का अनुरोध किया. नचिकेता का तीसरा वर एक प्रश्न के उत्तर के लिया था. प्रश्न था, ‘कोई कहता है कि मरने के बाद यह आत्मा रहती है, और कोई ऐसा कहते हैं कि नहीं रहता’. आप मुझे इसका निर्णायक ज्ञान दें, मेरे तीसरे वर में…यमराज ने बहुत प्रलोभन दिये नचिकेता को इस बर को छोड़ और सब सुख माँगने की, पर नचिकेता टस से मस न हुआ…यमराज के मुख से कठोपनिषद् का मूल विषय ब्रह्मज्ञान से अमरत्व को इसी जन्म मे कैसे पाया जा सकता है…
इस हजारों साल पहले हमारे ऋषियों द्वारा लिखे गए उपनिषद् में मृत्यु के देवता यमराज ने खुद नचिकेता को सिखाया था जो कभी नहीं हुआ। क्या है मृत्यु एवं कैसे व्यक्ति अमरत्व प्राप्त कर सकता है.आज भी शायद मानवता के लिए भारतीय धर्मग्रंथों के योगदान के बारे में अधिकांश शोध, व्यापक रूप से ख्याति प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालयों में हो रहे हैं।कभी कभी लगता है कि हमारी शिक्षा विभाग ने इस काम को धार्मिक, आध्यात्मिक संस्थानों के ज़िम्मे कर दिया है. एक विवेकानन्द द्वारा स्थापित ‘वेदान्त सोसाइटी’ अपनी बहुत शाखाओं के ज़रिये भारतीय के प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान को देश विदेश में बच्चों से ले सब उम्र के लोगों को समझा और फैला रहे हैं।आज यह सब इंटरनेट यू ट्यूब पर उपलब्ध है. हम इसका उपयोग क्यों नहीं करें…क्योंकि यही ज्ञान सर्वोपरि है। पढ़िये …समझिये, मनन करिये और जीवन में ही अमरत्व की कोशिश कीजिये…..

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