बृहदारण्यकोपनिषद् और तत्कालीन समाज में नारी

बृहदारण्यकोपनिषद् और तत्कालीन समाज में नारी: आजकल जब इस उपनिषद् को पढ़ने समझने की कोशिश कर रहा हूँ तो एक सांसारिक व्यक्ति होने के चलते उस समय के कुछ सामाजिक पक्षों की ओर सोचने के लिये बाध्य होना पड़ता है. उपनिषदों में वेद के सबसे उच्चतम ज्ञान का निचोड़ है- आत्मा- ब्राह्मण को इसी जन्म में मिल कैसे एक व्यक्ति खुद ब्राह्मण हो सकता है.

याज्ञवल्क्य उस समय के एक महान गुरू थे…जिनकी धाक पूरे सिद्ध ऋषियों में थी…जनक उस काल के एक अध्यात्म ज्ञान के ज्ञाता और प्रशंसक और बहुत ही समृद्ध राजा थे…उनके महल में सभी ज्ञानी ऋषियों की पहुँच थी और उनका आदर एवं सम्मान था..उनके जिज्ञाशाओं की तृप्ति होने पर ऋषि विशेष को बहुत धन राशि भी मिलती थी….एक प्रश्न के उत्तर में याज्ञवल्क्य खुद को अपने समय का सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी कह दस हज़ार स्वर्ण मुद्रा एवं एक हज़ार गाय प्राप्त करते हैं जनक से…यहाँ तक कि एक बार याज्ञवल्क्य के ब्रह्मज्ञान के उत्तर से संतुष्ट हो एक प्रकरण में वे यह भी कहते हैं याज्ञवल्क्य से, ‘मैं अपने एवं मेरे साम्राज्य को आपकी सेवा में समर्पित करता हूँ.’

पर बृहदारण्यक उपनिषद् तत्कालीन तीन नारी का ज़िक्र कर उस समय के समाज में उनके महत्व को दर्शाता है…गार्गी सबसे श्रेष्ठ लगती हैं ज्ञान की दृष्टि से…वे एक कथा में याज्ञवल्क्य से उनकी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिये प्रश्न करती हैं एवं अन्त में याज्ञवल्क्य के सावधान करने पर पीछे हट जाती है….( अध्याय ३,ब्राह्मण ६)..पर दूसरी बार गार्गी एकत्रित विद्वान ऋषियों से कहती हैं कि वे दो प्रश्न पूछेंगी याज्ञवल्क्य से और उसके उत्तर वे अगर ठीक देते हैं तो सभी को मान लेना चाहिये कि वे सर्वश्रेष्ठ हैं. बहुत विद्वतापूर्ण वे प्रश्न हैं और याज्ञवल्क्य के उत्तर भी. गार्गी सबसे कहती हैं कि वाक़ई याज्ञवल्क्य सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी हैं….( अध्याय ३ का ब्राह्मण ८).

पर दोनों अन्य नारियाँ याज्ञवल्क्य की पत्नियाँ हैं- पहली कात्यायनी एवं छोटी मैत्रेयी. मैत्रेयी को ब्राह्मण का ज्ञान था. मैत्रेयी एवं याज्ञवल्क्य की वार्ता बृहदारण्यकोपनिषद् में दो बार आई है (अध्याय २ के चौथे ब्राह्मण, और फिर से अध्याय ४ के पाँचवें ब्राह्मण में) मुझे इसका कारण मालूम नहीं है…याज्ञवल्क्य संन्यास लेना चाहते हैं अपनी सम्पत्ति का दोनों पत्नियों में बँटवारा कर और यह बात जब वह अपनी प्रिय पत्नी मैत्रेयी से कहती हैं, तो मैत्रेयी पूछती है कि क्या संसार का सब धन मुझे अमरत्व दे सकता है. याज्ञवल्क्य का उत्तर ही इस ब्राह्मण की विषयवस्तु है..

विद्वानों के अनुसार इस उपनिषद् का समय काल ईसा के ९०० से ६०० पूर्व का माना जाता है.मुझे इनके अलावा किसी विशेष नारी नाम का अब तक ज्ञान नहीं, अगर पता चलेगा तो फिर लिखूँगा.

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