नैतिक पतन से गुजरता भारत

आज की अवस्था में अच्छों अच्छों के भी आर्थिक तकलीफ़ का एक मुख्य कारण है अमरीकी तौर तरीक़े की आंख बन्द कर नक़ल करना, कमाये पैसों को बचाने के लिये कुछ त्याग नहीं करना, कुछ तकलीफ़ नहीं उठाना, समाज में तथाकथित अपनी नाक ऊँची करने के लिये बड़े बड़े मकान ख़रीद लेना, सबसे टॉप ब्रांड की चीजों को ख़रीदना, सबसे अच्छे स्कूलों में पढ़ाना, पता नहीं क्या क्या….यहाँ तक की निचले वर्ग के कामगार भी अपने आफिसरों या मालिकों की देखा देखी यही कर रहे हैं….न बचाना, न पौष्टिक खाना, पर शराब ज़रूर पीना, गुटका, या तम्बाकू खाना, न सरकारी योजनाओं का हिस्सा बनना, न इन्स्यशोरेंस कराना, ….

सभी की एक माँग हम सरकार की बात तो नहीं मानेंगे….पर उससे पैसे येन केन प्रकारेण बिचौलियों के ज़रिये अच्छी कमिशन दे भी ज़रूर लेंगे, आमदनी ठीक नहीं बताएँगे, टैक्स नहीं देंगे…..पर भुखमरी के लिये सरकार की बदनामी ज़रूर करेंगे….न पढेंगे, न सीखेंगे कोई हाथ का काम, न कोई व्यवसाय के गुर, पर सब ग़लत काम करेंगे बहकावे में आ कर समाज के गुंडों के कहने पर ….

ऐसे शायद किसी भी पुरानी सभ्यता का दम भरनेवाले लोग दूसरे देशों में इतने तादाद में होंगे….जहां धनी से धनी एवं गरीब अपने दायित्व को न निभाये, पर अपनी माँग के लिये किसी तरह का भी हिंसक प्रजातांत्रिक नाम का विद्रोह दिखाने के लिये पील पड़ें….

कोई सोचता है आज कोरोना के बन्द से कैसे आसमान नीला हो गया, रात में तारे दिखने लगे, गंगा, यमुना का पानी निर्मल हो गया, रास्ते साफ़ लगने लगे, प्रदूषण विदेशों के स्तर पर आ गया….केवल एक चीज़ के कारण कि लोग बाहर निकलते नहीं, उन्हें गन्दगी फैलाने का मौक़ा नहीं मिलता….हमारी तरह के लोग भी बाहरी देशों में रहते हैं पर वहाँ तो प्रकृति का इतना विद्रूप रूप नहीं देखने को मिलता….यह मौक़ा है कि देश का बुद्धिजीवी इन बातों को सोचे, अपनी संस्कृति एवं आधुनिक विज्ञान की मदद से माँ धरती को, आसमान को, गंगा माँ को प्रदूषण रहित बनाये, अपने को सम्पन्न बनाये, दूसरे कमजोरों की कमजोरी फ़ायदा उठा अनाप-शनाप धन जमा करने के पीछे नहीं पडे, अपना टैक्स दें, अपना क़र्ज़ वापस करे, अपना दायित्व निभाये, अपने कार्यक्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करे….अगर चीन, जापान, कोरिया के लोग कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं….

अनुशासन में रहे, बच्चों को भी वही शिक्षा दे…हम पीढ़ियाँ बनाते हैं…खा पीकर मरने के लिये हम नहीं आयें हैं….हम एक भगवान की संतान हैं, भाई, बहन है, हम एक हैं, सबकी भलाई में हमारी भी भलाई है ….नहीं तो कोविडा-१९ या इससे कोई बड़ी विपदा इन्जार में है….उससे कोई भी बच नहीं सकेगा, न अमरीका, न चीन या रूस, न पाकिस्तान, न यूरोप….

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