बिचारों के जंगल में-२

२७.६.२०१७ मेरे बिचार से श्रीमती मीरा कुमार को राम नाथ कोविन्द के बिरूद्ध राष्ट्रपति पद के चुनाव से हट जाना चाहिये, जब कि बिहार के मुख्य मंत्री तक उनके साथ नहीं हैं. केवल सोनिया गांधी के दबाव में उनकी प्रतिद्वंदिता और निश्चित परिणाम को जानते हुये कुछ अक़्लमंदी नहीं मानी जायेगी. दोनों कुमार एवं कोविन्द करीब करीब बराबरी के उम्मीदवार हैं, पर साफ बहुसंख्यक पक्ष का आदर मधुर रिश्तों पर आधारित प्रजातंत्र की परिचायक होती और बिदेश में भी भारतीय राजनीति के परिपक्वता की साख जमती. पर शायद यह ज़रूरत से ज्यादा भारतीय राजनीतिज्ञों से अपेक्षा होगी हमारी. मीरा कुमारी जी को कांग्रेस का बाबू जनजीवन राम के साथ किये ब्यवहार का भी ख़्याल रखना चाहिये था. अगर कांग्रेस दलितों का आदर करती तो लालबहादूर शास्त्री के अकाल मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री बनाती. मीरा जी को राष्ट्रपति बनाने का प्रयत्न न कर २०१९ का प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बना परिवारवादी बिल्ले से बच जाती.
२६.६.२०१७ दो रूपये या मुफ़्त बटोरे किसानों के टमाटर आज ब्यपारी अपना भाग्य और काला धन बना रहे हैं. कल नीचे के सब्जी वाले ने मुझपर मेहरबानी कर ६० रूपये प्रति किलो पर हमें दिया… जब तक इन बिचौलियों पर कोई नियम क़ानून द्वारा प्रतिबंध नहीं लगाया जायेगा, किसान आत्महत्या करते रहेंगे और क़र्ज़ माफ़ी की माँग होती रही है. अब यही बिचौलियों जी. एस. टी को सफल होने बाधा डालेंगे. आदत जो पड़ी है टैक्स न देने की. फिर यही वर्ग या इनके कर्मचारी GST को न देने या कम देने का क़ानूनी उपाय निकालेंगे. इसी तरह यह ब्यपारी वर्ग बनता है करोड़पति और देश के सिस्टम को अपने पॉकेट में रखते हैं.

२४.६.२०१७: आज के समय में और नई पीढ़ी के आँखों में हम फीके पड़ गये. पर कभी यह इमारत भी बुलन्द थी, देश के गाड़ियों और मशीन टूल्स वाले सर झुकाते थे अपनी जानकारी और सहायता, सुझाव के कारण. पर समय सिखाता है कि हम कितने भी नायाब सुझाव क्यों न दें, देश चलायेंगे संजय निरूपम, राहुल गांधी, और उमा भारती, ..अरविन्द केजरीवाल, ..सिद्धू जैसे लोग ही और देश की जनता को बेवक़ूफ़ बनाते रहेंगे , वैसे ही लोगों को भोट भी देंगे लोग, और सब कुछ पता नहीं कब तक ऐसे ही चलता रहेगा….हमारे तरह के लोग भी हार न मान अपने राह चलते रहेंगे, बिचार प्रकट करते रहेंगे

२२.६.२०१७: भारतीय मुसलमान, बिशेषकर कश्मीर के, जिनमें अंधिकाश हिन्दूओं के बंशज हैं, उन्हें उस पुरानी भारतीय संस्कृति को अपनाने में , मिल जुल कर रहने कोई असुविधा नहीं होनी चाहिये थी. यहाँ तक कि कश्मीर के नवयुवक क्या यह समझ नहीं सकते कि भट्ट, बक्सी, पंडित आदि जो उनके नामों में है उनके हिन्दूओं के ही बंशज होने के प्रमाण है. धर्म से हरदम बडा देश है. केवल हमारी अंदरूनी कमज़ोरियों के कारण बाह्य शक्तियाँ हमें हराती गई, हम बँटते गये एवं एक दूसरे के जान के दुश्मन हो गये. स्वतंत्र भाव से सोचिये, सब अन्तर मिट जायेगा. सब भाई भाई दिखेंगे…..एक बार सोचिये तो पाकिस्तान या यहाँ तक की बांग्ला देश में हिन्दूओं के साथ जो ब्यवहार किया गया वही अगर भारत में होता तो १८ -२० करोड़ों का क्या हाल होता…आप इंटरनेट देखते हो तो पढ़ो, समझो कश्मीर का इतिहास क्या है? अशोक के कश्मीर एक मुसलमान शासक ने करीब करीब सभी पंडितों को धर्म परिवर्तन करा दिया प्राण के बदले……सोचो, हम आज २१ वीं शताब्दी में झूठे धर्म के नाम के बदले क्या कर रहें हैं. ७० साल से जो भारत का अन्न का और पैसा लूट जो नेता तुम्हारे अरबपति बने उनसे तो कभी कोई सवाल नहीं किया………

२१.६.२०१७: कांग्रेस अब गद्दी के लिये देश बिरोधी हो चुकी है, संजय निरूपम की तरह का गुंडा अमिताभ बच्चन को जी एस टी के विज्ञापन से रोक रहा है. सोनिया, राहुल और उनके चमचे देश , किसानों , ब्यपारियों को भड़का रहे हैं, साफ है. देश के ख़ुराफ़ाती तत्व हैं ये. अब कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता जो ख़ुद देश को लुटे और अपने को महान अर्थबिज्ञ कहते न अपने साठ साल में कुछ किये न करने देंगे. देश की जनता को इन्हें देश निकाला दे देना चाहिये. हर जगह मुंहकी खा रहे हैं, पर आदत से बाज़ नहीं आते….

१९.६.२०१७: क्या निर्णय आया मोदी जी या बी जे पी का- बिहार के राज्यपाल देश के राष्ट्रपति होंगे अगले पाँच साल के लिये . क्या अंतर है कांग्रेस के ज़ैल सिंह और प्रतिभा जी से? बहुत थोड़ी. क्यों ज़रूरी है की राजनेता ही सभी पदों पर बैठायें जाये, टेक्नोक्रैट नहीं? क्यों सभी कुछ राजनीतिज्ञों के झोले में? देश के लिये क्या फ़ायदा होगा? कितने नौजवान पीढ़ी जो कमा कर टैक्स भी देती है, देश के सपने संझोती है, भोट भी देती है. पर कुछ भी उनकी सोच से मिलता नहीं होता. क्यों नहीं श्रीधरन, नारायनमूर्ति या फिर नन्दन निलेकनी जैसे लोग राष्ट्रपति बन सकते। क्यों घिसी पीटी कांग्रेसी तरीके से ही चलना चाहती हैं सभी पार्टियाँ? घूसख़ोरी रोकने का केवल बहाना है, आज भी बदस्तूर चल रही है नक़दी, काला. केवल कुछ या ज्यादा सीधे साधे लोग बेवक़ूफ़ बनते रहते हैं. तभी यह पता चल गया था जब मोदीजी क़र्ज़ माफ़ी की बात की थी चुनावी सभा में. क्या सब चुनावी खेल है? और साधारण लोगों को बरगलाने की महारियत की जीत है? अब किसान अपनी मर्ज़ी का कर रहे हैं, कल छोटे ब्यवसायी करेंगे. सरकारी ख़ज़ाना क़र्ज़ माफ़ी में ख़त्म होगा और फिर नोट छापेगी या बिदेशी क़र्ज़ लेगी. किसको यह सोचने की पड़ी है….सब माफ़िया बन जितना वसूल सकें में लगे हैं…देश जाये भांड में…

कल फादर्स डे था. अब यह अपने देश में भी प्रचलित होता जा रहा है. हम नक़ल करने में माहिर हैं. शायद यही हमारी शक्ति है. मैं केशव को समझा रहा था . माँ पिता हर देश में बहुत मिहनत और लगन से अपने बेटे बेटियों को समृद्ध, स्वस्थ, सुखी, और ख़ुश देखने के लिये वह वह सब करते हैं जो किसी के लिये सम्भव है. हर बच्चे को अपने काम और दोस्तों के साथ उनका सदा ख़्याल रखना चाहिये जहाँ तक सम्भव हो. यह भी शिक्षा का एक अंग है. मुझे आज भी इस बात का दुख होता है कभी कभी सोचते हुये- मैंने क्यों नहीं अपने दादा-दादी, पिताजी एवं माँ से एकान्त में पूछ पाया वे मुझसे क्या चाहते हैं, जब मैं अपने नौकरी में ब्यस्त था…..शायद वे कुछ न कहते …पिताजी और माँ तो आख़िरी के साल हमारे साथ रहे ………पर दादा- दादी तब मेरे पास न रह पाये जब उन्हें मेरे साथ ही रहना चाहिये था, क्योंकि मैं जो बना या कर पाया वह उनके कारण था…आज राकेश को केशव से फ़ेस टाइम पर बात करते देख बहुत अच्छा लगा और बहुत सारी यादें दिमाग़ में मँडराती रहीं…….काश, हर पिता माता और बच्चे सहअस्तित्व के इस मंतर को समझ पाते….

१७.६.२०१७: योगी अादित्यनाथ के ताजमहल के रेपलिका का उपहार स्वरूप भेंट का बिरोध बहुतों को अच्छा नहीं लगता होगा . पर है तो वह मक़बरा जंहा शाहजहाँ के परिवार के लोग दफ़्न हैं. मेरे ख़्याल से अशोक के सिंहों वाली मूर्ति जो खम्भों पर थी ज्यादा उपयुक्त है, या फिर नालन्दा या कोनार्क के मन्दिरों की रेपलिका. यह भारतीय ज्यादा है. श्री मोदी अपने उपहारों का चयन बढ़ियाँ करते हैं और उसे भारतीय रखते हैं…ताजमहल देख मेरी एक बहन ने कहा था, मुझे यहाँ क्यों लाये, नहाना पड़ेगा. 

१६.६.२०१७: 

वे आते हैं 

फिर जाते हैं 

अहसास तो पर 

दे जाते हैं

अपनापन का

कुछ हम कहते 

कुछ सुनते हैं

कुछ सीख नई

पा जाते है

जा कहाँ रहा

विज्ञान आज

सुन्दर भविष्य की

बडी आश

दुनिया कितनी 

सुन्दर होगी

जाने पर फिर 
ख़ालीपन फिर 

जीवन का सत्य 

बता देता 

है सभी तो

क्षणभंगुर 

फिर खोज 
शुरू होजाती है

बस एक शब्द में

कहूँ अगर……

क्या कभी ‘निस्पृह’
बन पाउँगा?

१४.६.२०१७: मैं चिदम्बरम की बिद्वता की इस लिये सराहना नहीं कर सका कि २००४ के बजट में किया गया देश के सब जलाशयों को मरम्मत कर जीर्णोद्धार का काम वायदा कर पूरा नहीं कर पाये. ये जलाशय पूरे देश में हमारे पूर्वजों ने बनवाये थे सिंचाई और सूखे से निपटने के लिये. आज की सरकार भी बडी मात्रा में तालाबों को बनाने का वायदा की है पर बताती नहीं उनमें कितने बने. देश के किसान केवल क़र्ज़ उतारने की बात करते हैं अपने कर्तव्यों की बात नहीं करते. सभी सिंचाई के नायाब तरीके जो सदियों में बने उन्हे भर कर अपना और देश का कितना नुकशान किये की बात नहीं करते. बैंकों के कर्मचारियों को घूस दे अनाप सनाप क़र्ज़ लेते हैं और कभी उसे लौटाने का इरादा ही नहीं रखते, क्योंकि एक बार सोनिया की सरकार ने रास्ता दिखा दिया है. अभी जब महाराष्ट्र में पाँच एकड़ से कम एवं एक लाख तक के क़र्ज़ माफ़ की बात हुई तो उसका भी बिरोध हो रहा है. इन्हीं किसानों के बच्चे जब सरकारी नौकरी में घूस ले लेकर घर भरते हैं तो उनके माँ बाप उसकी ऊपरी आपकी के बल पर लाखों और अब तो करोड़ों में तिलक माँगते हैं. फिर सरकार के लिये ज़रूरी ज़मीन दे ज्यादा से ज्यादा भरपाई वसूल करते हैं. देश एक लगातार चरित्र ह्रास की ओर बढ़ रहा है. क्या इलाज सोचेंगे लोग?सरकार या आज दी जाने वाली शिक्षा यह नहीं सुधार सकती.

६२ साल पहले….१९५५…..पालकी….मधुकरपुर …..बारात की गहमागहमी……माँड़ो ….शामियाने में होता छोटका बब्बनवा का नाच…..बिबाह बिधि…..कैसे उड़ गये वर्ष .पैरों में पंख बाँध …पता ही नहीं चला . सोने के दिन और चाँदी की रातें….सब हितैषियों की शुभकामना…..बड़ों का आशीर्वाद …..पूर्वजों के पुण्य फल का ख़्याल . यही रहा जीवन….

११.६.२०१७ एक सुखद आश्चर्य . दोपहर के विश्राम के बाद उठ चुका था , घंटी बजी तो सोचा लौंजी के लिये कच्चे आम ले रमा आई होगी. दरवाज़ा खुला तो समधिनी जयश्री जी, अपर्ना का चेहरा दिखा. पर फिर रबिजी एवं अपर्ना मुझे गेस्ट रूम में चलने का आग्रह किये. कहे अमरीका से कुछ गिफ़्ट आपके लिये. यमुना तबतक उठी नहीं थी. मैं वहाँ जा केशव को पाया और आश्चर्य से चिल्ला उठा…..फिर तो केवल केशव ही हम पर छा गये….केशव की स्कूली पढ़ाई ख़त्म हो गई है, कालेज शायद अगस्त में प्रारम्भ होगा….कुछ दिन अपनी ननिहाल और हमारे यहाँ रहेंगे….बहुत अच्छा लगा….
जी एस टी में निर्धारित टैक्स कम होना चाहिये यह उद्योग चाहता है जो लाखों, करोड़ों में हैं, किसान अपना समर्थन मूल्य चाहता है लागत के ऊपर ५० प्रतिशत , अपनी ज़मीन का सरकारी या ग़ैरसरकारी कामों के लिये मूल्य पाँच गुना, उद्योगों के मज़दूर चाहते हैं टॉप क्लास की सुबिधाऐं एवं सेलरी मैनेजरों के बराबर, दूकानदार अपनी प्रोफ़िट चाहता है अधिकत्तम, ख़रीदार हर चीज़ को सस्ता से सस्ता ख़रीदना चाहता है और सब चाहते है सरकार दे यह सब, यहाँ तक की दुर्घटना या आन्दोलनों में मरनेवाले के परिवारवाले चाहते कम से कम एक करोड़ सरकार से, …..सरकार कहॉ से लाये यह पैसा….अगर गेहूँ या किसी अनाज का दाम अगर बढ़ा दिया जाये ५००० रूपये क्विण्टल तो आटा भी तो सौ रूपये किलो होगा, वह नहीं होने देंगे, उत्पादकता बढ़ायेंगे नहीं या बढ़ने नहीं देंगे, काम ज्यादा करेंगे नहीं, ….क्या हल है इन समस्याओं का….वह सरकार सोचे और कौन सरकार, जिन्हें हम बिना सोचे चन्द रूपये के बदले चुने हैं….देश की समस्या से हमारा मतलब नहीं….क्या कोई कुछ करनेवालों की भी सुनेगा….

९.६.२०१७: इस बार आरोग्यम् , हरिद्वार का समय कुछ अलग रहा .हम करीब हफ़्ते भर ठहरे या रहे. यमुना के दबाव पर टी. वी भी लग गया. खाना बनाने के लिये बबीता मिल गई. शिव कुमार सिंह, और उनके बनारस यूनिवर्सिटी के अध्ययन काल के दोस्त विजय प्रताप से मुलाक़ात हुई. पर मुख्य बात थी कि यमुना और प्रतिभा की मुलाक़ात. हिन्दमोटर के दिनों का रिस्ता. प्रतिभा शिवकुमार की पत्नी हैं. विजय प्रताप जी की पत्नी अब नहीं रहीं है. लड़का अपने काम में लगा हैं, लखनऊ में रहते हैं. और मुझे लगा ज़िन्दगी के इस मोड़ पर हम सभी प्रसन्न रहने की कोशिश कर रहे हैं. शिवकुमार जी अभी भी कार्यरत हैं. ये दोनों मुझ से पाँच छ: वर्ष छोटे होंगे उम्र में. …….पर ऐंडी का दर्द तकलीफ़ देता रहा जिसकी चिन्ता होने लगी है. मैंने शायद कुछ अधिक ही घूमना चालूकर दिया था. कल ही हम भी नोयडा लौट जायेंगे. इलाज की बात सोचनी होगी, नहीं तो घूमना ही रूक जायेगा जो एकमात्र ब्यस्त, प्रसन्न , एवं स्वस्थ रखने का तरीक़ा है मेरा.

७.६.२०१७: हम ख़ुद गाँव के किसान परिवार से आते हैं, अत: इस बिषय पर लिखना ज़रूरी समझते हैं. सरकारी बैंकों से क़र्ज़ ले अगर किसान संगठित हो यह तय करें कि वह क़र्ज़ नहीं देना है, वह अपनी हक़ का इस तरह दुरूपयोग कर क़र्ज़ मांफी का माँग करें और हिंसक रास्ते अपनाये , तो देश के भविष्य के भयंकर आर्थिक संकट को कोई रोक नहीं सकता. कांग्रेस और सोनिया ने वह रास्ता अपनाया था चुनाव जीतने के लिये और जीत भी गईं सरकार की सब कमज़ोरियों के बावजूद. मोदी ने भी दुहराया उत्तरप्रदेश का चुनाव जीतने में किसानों का समर्थन पाने के लिये. पिछले तीन सालों में वापसी का कोई रास्ता न ढूँढ पाने के बाद कुछ नासमझ किसानों को बरगला कर फिर से उनका बिश्वास जीतने का प्रयास कर रहीं हैं सोनिया की कांग्रेस और कुछ बेईमान पार्टियाँ, शरद पवार की, उद्धव थाकरे की. देश के हर समझदार नागरिक को जिनमें किसान भी हैं यह राजनीति दाँव की हानि को समझना चाहिये. जो रास्ता आज सरकार इस दबाव में अपना रही है वह देश बिरोधी है. हर किसान ज्यादा से ज्यादा क़र्ज़ लेगा और आज की तरह का या इससे भी हिंसक रास्ता अपनायेगा. वह खेती की उन्नत पद्धति या उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास पर मिहनत क्यों करेगा? आज कृषि वैज्ञानिक पद्धति से करना ज़रूरी है एक ब्यवसायिक पेशे की तरह. अच्छा बीज, उचित गुणवत्ता का उर्वरक, ठीक सिंचाई , फ़सल बीमा आदि की ब्यवस्था और उसपर ज्यादा से ज्यादा निवेश सरकार की ज़िम्मेदारी है . पर यह किसानों की भी प्राथमिकता होनी चाहिये. अन्यथा किसानों की तरह का ही रास्ता छोटे , मंझोले और फिर बड़े ब्यवसायिक भी अपनायेंगे टैक्स और फिर क़र्ज़ मांफी के लिये. प्रजातंत्र क्या राजनीतिकों की मनमानी करने की खुली छूट देता है या देशहित का ख़्याल रखना ज़रूरी है? यह गद्दी पाने का हर मसले पर प्रयास देश के भविष्य को अन्धकारमय बना रहा है. हर पेशे में माफ़िया या बाहुबलियों का प्रयास चल रहा है देश को तोड़ने का. एक करोड़ तक की माफ़ी का ऐलान किन लोगों के लिये किया जा रहा है-किसानों के लिये या कृषि क्षेत्र के ब्यवसायियों के लिये? http://indianexpress.com/article/india/after-maharashtra-farmer-unrest-rocks-mp-6-killed-in-firing-govt-ready-for-talks-4692424/

२४.५.२०१७: देश की तथाकथित उच्च जाति में पैदा हुये सभी बाहुबली लोगों से करबद्ध प्रार्थना है कि शारीरिक शक्ति, धनबल एवं सम्बंध का दुरूपयोग अपने से कमज़ोरों को , दलितों को सताने में न करें..उन्हें सम्मानित बनाने में योगदान दें…. आप को उच्चॉ बनाने में उनका योगदान है…..आपके माता पिता के जन्म (प्रसव) को उन्ही जातियों ने सहज बनाया जब कोई अस्पताल नहीं थे. उनकी इज़्ज़त करना हर हिन्दू का कर्तव्य है..हर हिन्दू का यही राज है स्वर्ग पाने का……उनको नीचा समझना या कष्ट देना धर्म बिरूद्ध है और इसी जन्म में नर्क का दंड देता है. आज शिक्षा पा वे आप से आगे निकल रहें हैं, यह ईर्ष्या की चीज़ नहीं है, हमें हिदायत देता है उनको बराबर का दर्जा देने के लिये. कृपया सहारनपुर न दुहराइये…दुश्मन इसका फ़ायदा लेंगे…देश की इज़्ज़त, सरकार की इज़्ज़त दुनिया में ख़राब होगी……हर समझदार ब्यक्ति को नासमझों को समझाना चाहिये, न समझने पर दंड दिलाना चाहिये…जाति के आधार पर किसी का किसी तरह पक्षपात करना पाप है….राम ने शबरी को अपनाया, और उच्च जाति के रावण का बंध किया…कांस्य, समय रहते ये मनशोख लोग समझ पाते….हर हिन्दू जाति से ऊपर उठ केवल योग्य भारतीय बन जाता……कृपया यथा सम्भव अधिक से अधिक शेयर करें…..और महा शिक्षा अभियान में योगदान दें ….http://indianexpress.com/article/india/saharanpur-clashes-disquiet-in-congress-over-rahul-gandhis-silence-4672538/

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