दवाई की दूकान, डाक्टर, और एक बृद्ध : मेरी ग़लती या उनकी

दवाई की दूकान, डाक्टर, और एक बृद्ध : मेरी ग़लत या उनकी

(यह कहानी एक महीने पहले की है, पर कुछ बातें अभी की)

कल मेरे साथ एक वाक़या हो गया जो मुझे मानसिक चिन्ता दे गया बहुत गहरा. मेरी भी कुछ ग़लती थी…आम्र पाली इडेन पार्क के ज़मीन स्तर पर की दवाई के दूकान से मैं फ़रवरी में अमरीका जाते वक़्त क़रीब बीस हज़ार रूपये की दवाई ले गया था, आठ महीने रहने का बिचार था वहाँ . पर पत्नी की बीमारी के कारण अचानक लौट आने और सारी दवाइयों को वहाँ के डाक्टरों द्वारा रोक देने के कारण बहुत दवाइयाँ बच गईं थी. दूकान के मालिक ने जाने के पहले टेलिफ़ोन पर लौटा लेने की सहमति भी दी थी. पहले सेक्टर ४१ में रहते हुये बहूत बार अन्य दूकानों ने लौटा लिया था. आने पर देखा दूकान सँभालनेवाला अरून कुमार झा बदल गया है. नया व्यक्ति न मेरी बात मानता है न मालिक का टेलिफ़ोन नम्बर बताता है. एक दिन मैं सभी दवाइयों को लिस्ट कर मालिक के नाम एक पत्र के साथ उसे दे आया और कहा कि मालिक के पास भेज दे और उन्हें अपना निर्णय लिख कर हमें बताने को कहे. काफ़ी दिन होने पर भी वह कुछ बताता न था. दवाइयाँ हज़ारों की हैं…. आज फिर उसने वही नकारात्मक उत्तर दिया. मुझे भी पिछले दिनों की यमुना की बीमारी की परेशानियों से शायद ग़ुस्सा आ गया……”यह तो सरासर चोरी है…..” मेरी आवाज़ तेज़ थी….अचानक एक नवयुवक डाक्टर निकला और उसने जो और जिस तरह कहा वह मुझे अन्तर तक हिला गया…..”आप जानते नहीं किसी को चोर कहना सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दंडनीय अपराध है……पुलिस को फ़ोन करो……इन्हें बाहर निकाल दो……” मेरे पूछने पर कि क्या आप मालिक हो, कहा, “हाँ, मैं मालिक हूँ…..” वहाँ उपस्थित लोगों ने कुछ नहीं कहा. मुझे उस कर्मचारी पर तो कोई क्षोभ नहीं हुआ पर उस सुन्दर नौजवान डाक्टर पर, जो अपने को मालिक भी बताया (जो सरासर झूठ है जो बाद में पता चला)अत्यन्त क्षोभ हुआ. और अशक्त होने का पहली बार अहसास हुआ.. हर जगह यही देख रहा हूँ . बेचने के पहले कितना सब्ज़ बाग़ दिखाते हैं सभी……पर अगर कुछ सहायता चाहिये ग्राहक को वहाँ ऐसी ज़िल्लत झेलनी पड़ती है…… पुनश्च: वह डाक्टर आम्रपाली इडेन पार्क में ही भाड़े पर रहता है, उसकी पत्नी भी डाक्टर है और मेरे घर आ चुकी है यमुना को देखने….पर उस आने का मैंने दाम चुकाया था १५०० रूपये……आज डाक्टरों का ईमान का स्तर यही हो गया है….. 

मैं पूरे वाक़या को भूलना चाहता था, पर कल श्रीमती सिंह ने याद ताज़ा कर दिया घाव का और कुछ सोचने पर भी मैं मजबूर हो गया. उन्होंने बताया कि उनकी एक महिला मित्र ने महिला डाक्टर से जानना चाहा था और पूछा, ‘ क्या आप घर जाने पर १५०० रूपये लेती हो?’ ‘नहीं, मुझे तो शर्म्मा जी ने दे दिया. मेरा क्या दोष?’ आप क्या विश्वास कर सकते हैं? क्या करे यह बृद्ध? कहाँ जाये? किस किस से झगड़ा करे? पर ऐसे लोगों से सावधान ज़रूर रहना चाहिये यहाँ के अन्य लोगों को. दवाइयाँ भी मुझे वापस ले सांई मन्दिर के अस्पताल में देना है ख़ैरात . शायद किसी का कुछ भला हो…..

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