लन्दन से आती आवाज

है लगी आज
सबकी नजरें
लन्दन की ओर |
है आज जमाना,
ब्यक्ति, देश
है ब्यस्त,
लगा है
लिखने में
इतिहास नया |
मानव पौरुष का,
कीर्तिमान से आगे
बढ़ जाने का |
भारत डूबा पर
अंधकार का बोझ लिए,
अनशन में, बार्ता में,
या फिर
दूसरों का
गुण गाने में
या अतीत का गीत
गुनगुनाने में |
सोने चांदी की होड़ लगी
देशों में,
अरबों की टोली पर
खुश है
कांस्य पदक से|
जागो, उठो,
और सोचो
गया पल
नहीं कभी है आता |
संतोष नहीं है धर्म,
बनता
कारण अकर्मण्यता का,
एकलव्य ध्येय हो
रश्मिरथी हो
कुछ करो अनूठा
और अमर बन जाओ|

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