ये दोनों

निश्छल मन
कोमल तन
चुम्बन या
उनका आलिंगन
आकर्षक यह
जीवन हर पल |
मेरे मन की कुछ
अभिलाषा
इन दोनों ने है पूरी की|
उनकी प्यारी
मुस्कान कभी
दिल दहलाती
चिंघाड़ कभी
सब ही होती
आनंदमयी |
ठुकराना उनकी मांग मेरी
फिर चुपके चुपके आ जाना
चुम्बन की झड़ी लगा जाना |
खुश होते तो आ मिलते हैं
गुस्सा हों तो गुर्राते हैं |
अनसुनी करना राय मेरी
कुछ देर गए वह ही करना|
जो करें वही अच्छा लगता
दिल बाग बाग हो जाता है
बिन कहे बहुत कह जाता है
यह दिव्य बहुत ही नाता है|

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