होली है
Posted : March 1, 2010 at 5:42 am [IST]
होली की टोली
मटक रही
गोरी घर में
जा सटक रही
फिर हवा चली
फगुनहटा की
सब रंग उड़े
गुलाल चला
मिष्ठान बंटा
सब तृप्त हुए
और मदमाती
फिर भंग छनी
सब मस्त हुए
सब ब्यस्त हुए
गवनई हुई
चहकी मंडई
महके आँगन
कुछ शोर बढ़ा
जोगीरा सर्रर्रर
और बात बढ़ी
सब सराबोर
रंग चंहु ओर
क्या रंग चढ़ा
सब भेद मिटा
सब कष्ट गया
पहचान गई
तन मन भींगा
सब यार हुए
कब रात गई
और प्रात हुआ
जय हो होली
शुभ हो होली
होरी हो ली
- Indra
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