सूखा तरुवर
Posted : January 31, 2010 at 6:24 am [IST]
उपहास न कर इस तरुवर का
जो सूख गया |
बर्षों का आतप बात सहा,
मुस्काता छायादान दिया |
और फिर भी वह इस हालत में
बहुतों का तो मनभावन है|
कुछ चित्र बनाते हैं इसका
या छाया-छबि से मन भरते|
फिर जरा सोच कर देखो तो
यह शक्तिस्रोत्र तो अब भी है |
तंदूर में तुलसी के जलता
चिन्नो की चिता में खाक हुआ |
जलना ही जीवन लक्ष्य रहे
इस बात को क्या समझा पाया ?
- Indra
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