गिरवी रखे सपनें

Posted : October 8, 2006 at 11:14 am [IST]

मैं अपने हीरक सपनों का
कोई मालदार, शर्मसार महाजन
खोजता रहा |
दिखे बहूत
जिनकी अपार धनराशि
खरीद सकती थी मेरे सपने,
पर निकले सब देशहित, लोकहित
बेकार थे उनके लिये |
वे जल्दी में थे
अरबों को खरबों तक ले जाने में
मेरे सपने नहीं भाये |
सोचता रहा, खोजता रहा
एक महाजन, गिरवी रख ले
मेरे सपने, मुफ्त ही सही|
नहीं मिला,
थक कर, कुछ सो्चकर
गिरवी रख दिया आखिर में
अपने हीरक सपने
अपनों के ही पास
शायद बच जायेगें
सुरक्षित शायद,
इसी की खूशी है|

- Indra

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