शिकायत से स्वीकार तक
Posted : May 30, 2005 at 10:04 am [IST]
आमित गरल जीवन भर पी कर
कहो कहाँ मै शिव हो पाया |
कठिन परिश्रम पागलपन तक
कहो कहाँ कब शिखर झुकाया |
सदा चला अपने सदपथ पर
शायद यह पथ ह्रिदय दुखाया |
सपने देखा और दिखाया
राह चला फिर राह बनाया
साथ नहीं फिर भी मैँ पाया |
नवरगँ की दुल्हन पाकर
उसे सजाया, उसे बनाया
फिर क्योँ नहीँ भरोसा पाया |
मेरी पूजा मेरी मन्नत
सब हित ही हो
चाह यही क्या , मन भरमाया |
नहीँ देव मैं सब कुछ पाया
केशव पाया,
गुडिया पाया
और दुलारा सौनिक पाया |
सब तो पाया |
- Indra
Category: IRS in US '05 |
Leave a Comment